शब्द शक्ति किसे कहते हैं// परिभाषा और उदाहरण// Best Notes- 38 - Hindi Gyan Sansar
Hindi Gyan Sansar is Best Plateform for Learning and Entertainment.
Hindi Grammar / January 6, 2025

शब्द शक्ति किसे कहते हैं// परिभाषा और उदाहरण// Best Notes- 38

Shabd Shakti meaning in Hindi

हिन्दी काव्य शास्त्र में शब्द शक्ति महत्वपूर्ण भाग है। इस लेख Shabd shakti class 12 में हम, शब्द शक्ति किसे कहते हैं, शब्द शक्ति के प्रकार, Shabd shakti in Hindi, शब्द शक्ति के उदाहरण आदि को सरल भाषा में समझ कर अपने ज्ञान में वृद्धि कीजिए

 

 

शब्द शक्ति किसे कहते हैं//

Shabd shakti in Hindi

शब्द में निहित अर्थ को प्रकट करने वाले व्यापार को शब्द शक्ति कहा जाता है।

 

जिस शक्ति के द्वारा शब्द का अर्थ के अनुसार प्रभाव पड़ता है उसे शब्द शक्ति कहते हैं। अर्थात शब्द का अर्थ बोध कराने वाली शक्ति को शब्द शक्ति कहलाती है।

 

आचार्य चिंतामणि के अनुसार – “जो सनि परे सो शब्द है, समुझि परे सो अर्थ ” अर्थात जिसको सुना जाए वह शब्द है और उस शब्द से जो समझ मे आए वह अर्थ होता है।

 

 

काव्यशास्त्र में शब्द शक्ति के लिए व्याकरण शास्त्र का सहारा लिया है, लक्षणा के लिए मीमांसा का और व्यंजना के लिए उसने अपना अलग रास्ता बनाया है।

 

शब्द शक्ति के प्रकार/ shabd shakti ke prakar 

शब्द शक्ति कितने प्रकार की होती हैं?

 

हिन्दी काव्य शास्त्र में तीन शब्द शक्ति होती हैं।

अभिधा शब्द शक्ति

लक्षणा शब्द शक्ति

व्यंजना शब्द शक्ति

 

देव ने अभिधा शब्द शक्ति को सबसे श्रेष्ठ माना है।

देव ने कहा है –

“अभिधा उत्तम काव्य है, मध्य लक्षणाहीन।

अधम व्यंजना रस विरसा, उलटी कहत नवीन।”

 

1. अभिधा शब्द शक्ति – shabd shakti class 12 

 

अभिधा शब्द शक्ति की परिभाषा

 

“जिस शब्द से मुख्य अर्थ का प्रत्यक्ष बोध होता हो अर्थात वक्ता द्वारा कहे गए कथन का अर्थ मुख्य अर्थ से लिया जाए वहां आपदा सब शक्ति होती है”

 

दूसरे शब्दों में – “शब्द को सुनकर अथवा पढ़कर श्रोता को जो लोक प्रसिद्ध अर्थ की प्राप्ति होती है उसे अभिधा शब्द शक्ति कहते हैं।”

 

अभिध शब्द शक्ति के वाचक शब्द को वाच्यार्थ, मुख्यार्थ , संकेतार्थ कहते हैं।

 

आपदा शब्द शक्ति द्वारा रूढ़ योगिक योगरूढ़ शब्दों का अर्थ बोध होता है।

1. रूढ़ शब्द – जिन शब्दों से संधि, समास, प्रत्यय, उपसर्ग में से एक भी प्रक्रिया काम नहीं करती अर्थात उनके खंड नहीं होते हैं, उन्हें रूढ़ शब्द कहते हैं। जैसे दिन, रात, हाथी, घोड़ा, आदमी, बालक आदि।

 

2. यौगिक शब्द -; जिन शब्दों के शब्द संघटना में बहुव्रीहि समास को छोड़कर के संधि, समास, प्रत्यय, उपसर्ग आदि में से एक प्रक्रिया आवश्यक रूप से होती है, होने यौगिक शब्द कहते हैं। जैसे – मोहन, सोहन, विद्यालय, वाचनालय, व्यवहार आदि।

 

3. योगरूढ़ शब्द – जिन शब्दों में शब्द संघटना के तत्व होते हैं लेकिन उनका अर्थ तीसरे अर्थ के लिए प्रसिद्ध हो जाता है, उसे योगरूढ़ शब्द कहते हैं। गणपति, शिव, विष्णु, दशानन, सिंधुजा आदि।

इसमें बहुव्रीहि समास के सभी उदाहरण आते हैं।

 

अभिधा शब्द शक्ति के उदाहरण 

मोहन स्कूल जाता है। 

गाय खेत में चर रही है।

बालक पुस्तक पढ़ता है।

मोनू एक नटखट लड़का है।

विद्यार्थी स्कूल जाते हैं।

शेर जंगल में रहता है।

 

कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।

वा खाये बौराय जग, वा पाये बौराय।

 

तीन बेर खाती थी वह तीन बेर खाती हैं।

 

अधिकांश यमक अलंकार के उदाहरण में आपदा शब्द शक्ति होती है।

 

 

2. लक्षणा शब्द शक्ति / Lakshana shabd shakti in Hindi 

 

लक्षणा शब्द शक्ति की परिभाषा

“जब वाक्य अथवा शब्द के मुख्यार्थ की प्रतीति सीधे-सीधे न होकर रूढ़ (प्रसिद्ध ) या प्रयोजन (उद्देश्य) के आधार पर होती है, वहां लक्षणा शब्द शक्ति होती है।

 

दूसरे शब्दों में – “किसी वाक्य में प्रयुक्त शब्द का मुख्यार्थ लोक प्रसिद्ध अर्थ प्राप्त नहीं होता हो तो वहां उसके बाद उस शब्द का अर्थ लक्ष्यार्थ द्वारा लिया जाता है, तो उसे लक्षणा शब्द शक्ति कहते हैं।”

 

इसके अलावा इस प्रकार कह सकते हैं – “जब वक्ता द्वारा कहे गए कथन का अर्थ मुख्यार्थ से न लेकर लक्ष्यार्थ से लिया जाए तो वहां लक्षण शब्द शक्ति होती है।”

 

मैं आशा करता हूं कि अब आप तीनों परिभाषाओं को पढ़कर समझ गए होंगे की लक्षणा शब्द शक्ति किसे कहते हैं।

 

लक्ष्मण शब्द शक्ति के भी दो भेद होते हैं।

1. रूढ़ा लक्षणा

2. प्रयोजनवती लक्षणा

 

1. रूढ़ा लक्षणा 

जब किसी रूढ़ी के कारण मुख्यार्थ को छोड़कर अन्यार्थ ग्रहण किया जाता है तो वहां रूढ़ा लक्षणा शब्द शक्ति होती है।

इस शब्द शक्ति को रूढिमती लक्षणा, निर्व्यंग्या लक्षणा भी कहते हैं।

 

जैसे –

राजस्थान वीर है।

यहां राजस्थान का मुख्यार्थ राजस्थान राज्य से है। परंतु यहां इसका अर्थ बोध की बाधा है कि राजस्थान तो एक क्षेत्र विशेष का नाम है। वह वीर कैसे हो सकता है। अतः यहां लक्ष्यार्थ यह है कि राजस्थान के निवासी वीर हैं। यह अर्थ आधार आधेय संबंध की दृष्टि से लिया गया है। यह अर्थ ग्रहण करने से कारण है यहां रूढ़ि लक्षणा शब्द शक्ति होगी।

 

मोहन सदा चौकन्ना रहता है।

यहां मोहन चार कानों वाला नहीं हो सकता है। इसलिए यहां लक्षणा शब्द शक्ति है।

 

पुलिस को देखकर कर चोर नौ दो ग्यारह हो गए।

यहां पर नौ दो ग्यारह होना भाग जाने के लिए रूढ़ या प्रसिद्ध है।अतः यहां पर रूढ़ि लक्षणा शब्द शक्ति होगी।

 

बड़े हरिश्चंद्र बनते हो।

वह हवा से बातें कर रहा है।

लाल पगड़ियां जा रही हैं।

राधिका तो निरी गाय है।

 

एक तो करेला और दूजा नीम चढ़ा।

नौ दो ग्यारह होना।

ऊं के मुंह में जीरा।

आस्तीन का सांप होना।

सभी लोकोक्ति और मुहावरों के उदाहरण में रूढि लक्षणा शब्द शक्ति होती है।

 

2. प्रयोजनवती लक्षणा 

जब किसी अभिप्राय या प्रयोजन को सिद्ध करने के लिए लक्षणा की प्रवृत्ति होती है तो उसे प्रयोजनवती लक्षणा कहते हैं। 

प्रयोजनवती लक्षणा में जब मुख्य अर्थ में बाधा उत्पन्न होती है तो प्रयोजन से ही अन्यार्थ को निश्चित किया जाता है, जिसको लक्ष्यार्थ कहा जाता है। जैसे –

 

आंख उठाकर देखा तो सामने हड्डियों का ढांचा खड़ा था।

यहां हड्डियों के ढांचे के ढांचे द्वारा व्यक्ति को दुर्बल बताना वक्ता का प्रयोजन है, इसलिए यहां प्रयोजनवती लक्षणा होगी।

 

उसका मुख चन्द्र है।

मेरे सिर पर क्यों बैठते हैं।

सारा घर तमाशा देखने गया।

 

बीती विभावरी जाग री।

अंबर पनघट में डूबा रही तारा घट उषा नागरी।

 

इस काव्य पंक्ति में अंबर को पनघट के समान, तारों को घड़े के समान तथा उषा को नागरी के समान बतलाया गया है इसी कारण यहां लक्षणा शब्द शक्ति होगी। इसमें रूपक और मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किया गया है।

 

3. व्यंजना शब्द शक्ति/ Vyanjana shabd Shakti in hindi 

 

व्यंजना शब्द शक्ति किसे कहते हैं?

व्यंजना शब्द शक्ति की परिभाषा

शब्द की जिस शक्ति से मुख्यार्थ और लक्ष्यार्थ से भिन्न अर्थ का बोध होता है, वहां व्यंजना शब्द शक्ति होती है। अर्थात वक्ता द्वारा कहे गए कथन का अर्थ न तो मुख्यार्थ से लिया जाए और न ही लक्ष्यार्थ से लिया जाए, इन दोनों को छोड़कर अन्यार्थ लिया जाए उसे व्यंजना शब्द शक्ति कहते हैं।

व्यंजना शक्ति को बोध कराने वाले शब्द को व्यंजक शब्द कहते हैं और बोधित अर्थ को व्यंग्यार्थ कहते हैं।

 

व्यंजना शब्द शक्ति के दो भेद होते हैं।

1. शाब्दी व्यंजना 

2. आर्थी व्यंजना 

 

1. शाब्दी व्यंजना

शाब्दी व्यंजना के भी दो भेद होते हैं।

 

A. अभिधा मूला शाब्दी व्यंजना – जब किसी पद में अभिधा शब्द शक्ति के द्वारा अनेकार्थी शब्दों का एक अर्थ निश्चित कर दिया जाए, उसे अभिधा मूला शाब्दी व्यंजना शब्द शक्ति कहते हैं।

जैसे –

चिरजीवौ जोरी जुरै, क्यों न सनेह गम्भीर।

को घटि, ये वृषभानुजा, वे हलधर के वीर।

यहां सामान्य अर्थ के अनुसार वृषभानुजा, और हलधर के वीर के लिए क्रमश गाय और बैल के लिए किया गया है। यहां मुख्यतः और लक्ष्यार्थ में बाधा उत्पन्न होकर के इसका तीसरा अर्थ वृषभानुजा, और हलधर के वीर के लिए क्रमश राधा और कृष्ण के लिए होता है।

 

सुबरन को ढूंढत फिरत कवि, व्यभिचारी और चोर।

 

यहां सुब्रत शब्द के लिए तीन अलग-अलग अर्थ निकलते हैं। कवि के लिए सुंदर वर्ण की आवश्यकता होती है, व्यभिचारी के लिए सुंदर स्त्री की और चोर के लिए स्वर्ण नामक धातु की आवश्यकता होती है।

 

B. लक्षणामूला शाब्दी व्यंजना 

 

जब किसी प्रयोजन की सिद्धि हेतु किसी लक्षण शब्द का प्रयोग किया जाए तो वहां लक्षणा मूला शब्द शक्ति होती है।

जैसे –

चाले की बातें चली सुनति सखिन के टोल।

गोये हूं लोयन हंसत विहंसत जात कपोल।

ऐसे काव्य पंक्ति में गौने की बात सखियों के मुख सुनकर नायिका के प्रसन्न होने का वर्णन किया गया है। यहां कपोलों का हंसना मुख्य अर्थ में बाधा उत्पन्न करता है। यहां नायिका के हृदय में अपने प्रियतम के प्रथम मिलन की उत्कंठा उत्पन्न होती है। इसलिए यहां लक्षणा मूला व्यंजना शब्द शक्ति होगी।

 

2. आर्थी व्यंजना शब्द शक्ति 

 

जिस शब्द शक्ति में व्यंग्यार्थ किसी शब्द पर आधारित ना हो करके अर्थ पर आधारित होता है वहां आर्थी व्यंजना शब्द शक्ति होती है।

यह दस अर्थ विशिष्टताओं के कारण भिन्न अर्थ का बोध कराती है। जो इस प्रकार है – काकु वक्रता के कारण, वाक्य, वाच्य, श्रोता के कारण, वक्ता के कारण, देश, काल, चेष्टा, प्रस्ताव, अन्सन्निधि।

 

जैसे –

निरखि सेज रंग भरी लगी उसासे लेन।

कछु न चैन चित्त में रह्यों चढत चांदनी रैन।

होली के दिनों में चांदनी रात में नायक की अवस्था का वर्णन एक सखी नायक से कर रही है कि रंग-बिरंगी सेजों को देखकर वह आहें भरने लगती है और

व्याकुल हो जाती है। इस कथन से सखी का प्रयोजन यह है कि नायक अत्यंत निष्ठुर है उसे अपने नायिका से अलग तो बिल्कुल भी नहीं रहना चाहिए।

 

Shabd shakti in Hindi – MCQ

 

Q. 1. शब्द शक्ति किसे कहते हैं

उत्तर – शब्द में निहित अर्थ को प्रकट करने वाले व्यापार को शब्द शक्ति कहा जाता हैं।

जिस शक्ति के द्वारा शब्द का अर्थ के अनुसार प्रभाव पड़ता है उसे शब्द शक्ति कहते हैं। अर्थात शब्द का अर्थ बोध कराने वाली शक्ति को शब्द शक्ति कहलाती है।

Q. 2. शब्द शक्ति कितने प्रकार की होती हैं?

उत्तर – शब्द शक्ति तीन प्रकार की होती है।

अभिधा शब्द शक्ति

लक्षणा शब्द शक्ति

व्यंजना शब्द शक्ति

 

Q. 3. अभिधा शब्द शक्ति किसे कहते हैं?

 

उत्तर – “जिस शब्द से मुख्य अर्थ का प्रत्यक्ष बोध होता हो अर्थात वक्ता द्वारा कहे गए कथन का अर्थ मुख्य अर्थ से लिया जाए वहां आपदा सब शक्ति होती है”।

 

4. व्यंजना शब्द शक्ति किसे कहते हैं?

उत्तर – शब्द की जिस शक्ति से मुख्यार्थ और लक्ष्यार्थ से भिन्न अर्थ का बोध होता है, वहां व्यंजना शब्द शक्ति होती है।

 

हिन्दी व्याकरण

 

वाक्यांश के लिए एक शब्द 

 

 

Spread the love
                                   

Hindi Gyan
Sansar के बारे में

               

Hindi Gyan Sansar एक शैक्षणिक वेबसाइट है। यहां हम हिन्दी के लिए विस्तृत व्याकरण के संसाधन प्रदान करते हैं, साथ ही मनोविज्ञान (Psychology) के Notes व Questions-answers प्रदान करते हैं। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों को स्पष्ट, रोचक ज्ञान प्रदान करना एवं उनकी समझ विकसित करना है।

Contact Us

Call Us on : 9461913326

Email : hindigyansansar24@gmail.com

© Hindi Gyan Sansar. All Rights Reserved. Website Developed By Media Tech Temple