हिन्दी भाषा का प्रसिद्ध मुहावरा अपने पैरों पर खड़ा होना (apne pairon par khada hona) है जिसका प्रयोग आम बोलचाल में बहुतायत में होता है। इस पोस्ट में हम इसका अर्थ और वाक्य प्रयोग विभिन्न उदाहरण से जानेंगे।
“अपने पैरों पर खड़ा होना” हिन्दी भाषा का प्रसिद्ध और आम बोलचाल में प्रयोग किया जाने वाला मुहावरा है। जब कोई व्यक्ति वयस्क हो जाता है तो उसके माता-पिता और रिश्तेदारों को उसके जीवन निर्वाह की चिंता होती है। मनुष्य को बड़ा होकर अपने माता-पिता की तरह ही अपनी गृहस्थी बसानी होती है और अपने बीबी बच्चों की परिवरिश करनी होती है।
माता-पिता उसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षा दिलाते हैं। उनका सपना होता है हमारी संतान पढ़-लिखकर कोई सरकारी या निजी धंधा करें। जिससे वह अपने दैनिक खर्चे और अन्य सामाजिक जिम्मेदारियों को अच्छे से निवाह सके।
जब व्यक्ति माता-पिता की इच्छा के अनुसार कहीं नौकरी प्राप्त कर ले या अपना धंधा रोजगार करने में सक्षम हो जाता है और घर की विभिन्न जिम्मेदारियों की निर्वाह करने लग जाता है तो उसके लिए आम बोलचाल में एक उपवाक्य प्रसिद्ध हो गया ‘अपने पैरों पर खड़ा होना ‘।
1. मोहन को पढ़-लिखकर एक सरकारी नौकरी मिल गई, वह अब अपने पैरों पर खड़ा हो गया है।
2. गुड्डू ने ई-मित्र की दुकान खोल ली। वह अपने पैरों पर खड़ा हो गया है और उससे अपनी गृहस्थी चलाता है।
3. दीनदयाल ने मोटरसाइकिल मैकेनिक का काम सीखकर अपने पैरों पर खड़ा हो गया है।
4. कृति ने सिलाई का काम सीख लिया और अपने घर को आराम से चला लेती है, अब वह किसी के आश्रित नहीं है।
5. स्मृति नाम की लड़की पढ़ने में बहुत होशियार थी।वह अब एक अध्यापिका बन गई है। और अपने पैरों पर खड़ा हो गई है।
6. विशाल पत्थर का काम सीख कर अपने पैरों पर खड़ा हो गया है और वह किसी के आश्रित नहीं है।
8. धवन पढ़ने में कमजोर था लेकिन उसने मोटर मैकेनिक का काम सीख लिया और अपने पैरों पर खड़ा हो गया है।
9. विपुल ने अपने पिता की मृत्यु के बाद अपनी खेती को संभाल लिया है और अपने पैरों पर खड़ा हो गया है।
10. रोहित ने घड़ीसाज का काम सीख लिया है और अच्छा पैसा कमा कर गृहस्थी चलाता है। अब वह अपनी रोजी-रोटी स्वयं कमाता है।
राम और गोपाल दो मित्र थे। राम के पिताजी एक धनी व्यक्ति थे। और गोपाल के पिताजी प्रतिदिन मजदूरी करके अपने घर का खर्चा चलाते थे। राम और गोपाल दोनों एक ही कक्षा में साथ-साथ पढ़ते थे। धीरे-धीरे दोनों वयस्क हो जाते हैं और उनकी शादी हो जाती है।
राम के पिताजी एक व्यापारी थे। राम के पिताजी वृद्ध हो जाते हैं।राम ने अपने पिता का कारोबार संभाल लिया और वह अपनी रोजी-रोटी स्वयं कमाने लगा। गोपाल के गरीब थे इसलिए वह आगे की पढ़ाई नहीं कर पाता है। एक दिन अचानक गोपाल के पिताजी की मृत्यु हो जाती है और घर का सारा बोझ उसके ऊपर आ गया।
गोपाल को राम ने दोस्ती के नाते कुछ पैसे दिए। गोपाल ने उन पैसों से एक व्यापार शुरू किया। धीरे-धीरे उसका धंधा बढ़ने लगा। वह अब किसी के आश्रित नहीं है और अपने पैरों पर खड़ा हो गया है। आज गोपाल एक अच्छी कम्पनी का मालिक है। उसने राम के पैसे वापस लौटा दिए। और उसे धन्यवाद दिया।
अमन कक्षा दसवीं का विद्यार्थी था। उसकी मां की मौत हो चुकी थी, जब अमन केवल दो वर्ष का था। उसका लालन-पालन उसकी नानी ने किया। ननिहाल में ही उसने स्कूली शिक्षा ग्रहण की। अमन के पिता भी बीमार पड़ गए और अब वे अपनी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में असफल हो रहे थे।
अमन को इस बात का पता चला कि उसके पिता बीमार हैं और कुछ नहीं पा रहे हैं। तो अमन अपने गांव लौट आता है। अठारह वर्ष का होते ही अमन की करनी पड़ी। अब अमन को घर चलाने के लिए पैसा कमाने की चिंता सताने लगी। वह रात-दिन किसी रोजगार की तलाश में भटकता रहता।
एक दिन अमन को अपने स्कूल के गुरुजी मिल गए और उनको सारी घटना बताई। उसके गुरु ने उसको सौ रुपए दिए। अमन ने सौ रुपए से एक किराए की दुकान परचून का छोटा सा काम शुरू किया। आज उसकी शहर में बहुत बड़ी दुकान है जिसका बहूत बड़ा टर्नओवर है।
गुरु की सलाह और अपनी सूझबूझ से अमन आज बहुत बड़ा व्यापारी बन गया। उसने अपने पिता अच्छे डाक्टर से इलाज करवाया और वे स्वस्थ हो गए। इस प्रकार अमन मेहनत करके स्वावलंबी बनकर अपने पैरों पर खड़ा हो गया।
इस मुहावरे “अपने पैरों पर खड़ा होना” (Apne Pairon Par Khada Hona) से हमें शिक्षा लेनी चाहिए कि हमें किसी के आश्रित नहीं रहना चाहिए। और हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। हमें केवल एक ही बात ध्यान रखनी चाहिए कि ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’ ।
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। हमें समाज में रहकर सामाजिक कार्य भी करते रहना चाहिए। अपने पैरों पर खड़ा होना मुहावरे की सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका है। हमें समाज में रहकर किसी के सामने हाथ नहीं फैलाने चाहिए। अपने जीवन यापन के लिए कोई न कोई कार्य अवश्य करना चाहिए।
अमन से हमें सीखना चाहिए कि छोटी उम्र में शादी हो गई और गुरु जी का सानिध्य मिल गया। जिससे अमन एक बड़ा व्यापारी बन गया। हमें कभी किसी की ओर मुंह नहीं ताकना चाहिए।
हम उम्मीद करते हैं कि “अपने पैरों पर खड़ा होना” ( Apne Pairon Par Khada Hona) मुहावरे का अर्थ और भावार्थ दोनों भली-भांति समझ में आ गए होंगे। किसी प्रकार का कोई सवाल हो तो कमेंट करें या contact us फार्म भरें।
धन्यवाद
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