“डूबते को तिनके का सहारा” ( Doobte Ko Tinke Ka Sahara) हिन्दी भाषा का प्रसिद्ध मुहावरा है। इस मुहावरे का प्रयोग आम बोलचाल में अधिकतर किया जाता है। जब कोई व्यक्ति आपत्ति में हो तब उसको यदि थोड़ी सहायता मिल जाती है तो वह सफल हो जाता है। आइए इस पोस्ट में इस मुहावरे को विस्तार से समझिए
मुहावरे किसे कहते हैं/ Muhaware Kise Kahate Hain?
मुहावरे की परिभाषा :-
“जब किसी बात को जनसाधारण के लिए एक वाक्यांश के माध्यम से उनकी मातृभाषा में कहा जाता है उसे मुहावरे कहते हैं।”
मुहावरे का अर्थ / Muhaware Ka Arth
1. आपत्तिकाल में थोड़ी सहायता उपयोगी होती है/ Apttikal main thodi sahayata upayogi hoti hai
स्पष्टीकरण – जब कोई व्यक्ति किसी आपत्ति में हो और उसे बचने का कोई रास्ता नहीं दिखाई देता है। ऐसे समय में उसे इस आपत्ति से उबरने के लिए किसी की सहायता की आवश्यकता होती है। इस आपत्ति से बच निकलने के लिए छोटी सी सहायता मिल जाती है तो वह बहुत उपयोगी होती है।
2. संकटग्रस्त व्यक्ति को थोड़ी राहत मिलना/ Sankatgrast vyakti ko thodi Rahat milna
स्पष्टीकरण – कभी-कभी इंसान बहुत संकटग्रस्त हो जाता है। इस संकटकाल में वह काफी दुखी होता है। इस समय उसे थोड़ी सी राहत मिल जाए तो वह आनंद का अनुभव करता है। इस राहत देने वाली वस्तु को ही डूबते को तिनके का सहारा कहा जाता है।
3. विशेष परिस्थिति में छोटा-सा उपाय कारगर होता है/ Vishesh Paristhiti Main Chhota Sa Upay Kargar Hota hai
स्पष्टीकरण – जब कोई व्यक्ति विशेष परिस्थिति का सामना कर रहा हो उस समय एक छोटा सा उपाय भी इस विशेष परिस्थिति से निकलने में कारगर होता है।
4. व्यक्ति की सफलता में मामूली तरकीब/ Vyakti Ki Safalta Main Mamuli Tarkeeb.
स्पष्टीकरण – व्यक्ति बहुत समय से सफलता प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहता है लेकिन उसे सफलता नहीं मिलती है। तब व्यक्ति निराश हो जाता है। सफलता प्राप्त करने में उसे कोई मामूली सी तरकीब काम आ जाती है।
तब वह उसके लिए उस व्यक्ति के समान होती है जब कोई इंसान पानी में डूब रहा हो और उसे कोई तिनके के समान वस्तु सहारा बन जाती है और वह डूबने से बच जाता है।
“डूबते को तिनके का सहारा” मुहावरे का प्रयोग किसी व्यक्ति के बारे तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति किसी मुसीबत में हो और उसे उस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए कोई छोटा रास्ता मिल जाता है।
अर्थात किसी व्यक्ति की समस्या का समाधान करने में कोई तुच्छ राह मिल जाती है और व्यक्ति उस समस्या का समाधान कर लेता है । इस समाधान को ही डूबते को तिनके का सहारा कहा गया है।
1. विवेक को परीक्षा में उनके गुरु जी ने कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर का दोहराव कराया जिससे वह कक्षा दसवीं में उत्तीर्ण हो गया। यह तो उसके लिए डूबते को तिनके का सहारा के समान हो गया।
2. सुरेश एक प्रतियोगी परीक्षा देने जा रहा था। उसकी परीक्षा केंद्र पर पैदल पहुंचना कठिन था। तभी एक सज्जन बाइक पर आए और उसे परीक्षा केंद्र पर छोड़ दिया। यह सज्जन सुरेश के लिए डूबते को तिनके का सहारा के समान हो गए। उसे उस परीक्षा में सफलता मिल गई और सरकार नौकर बन गया।
3. मोहित बहुत तेज गति से मोटरसाइकिल चला रहा था। उसकी मोटरसाइकिल फिसल कर गिर गई और उसे गहरी चोट लगी। वह रास्ता सुनसान था। लेकिन उसकी किस्मत से एक व्यक्ति वहां से गुजर रहा था। उसने मोहित को तुरंत उठाया और अस्पताल में भर्ती कराया। मोहित की जान बच गई।
अस्पताल में उसके सम्बन्धी पहुंच गए। सारी घटना की जानकारी मिलने के बाद सभी कहने लगे कि इस डूबते को तिनके का सहारा मिल गया जिससे इसकी जान बच गई नहीं तो इसकी मृत्यु हो सकती थी।
4. एक बालक नदी में कूदकर नहा रहा था। वह तैरना नहीं जानता था। वह डूबने लगा। उसे एक राहगीर ने देखा लिया। राहगीर उस बालक को नदी में कूदकर बाहर निकाल लेता है। उस बालक की जान बच जाती है। वह राहगीर उस बालक को डूबते को तिनके का सहारा बन गया।
5. एक बार दो मित्र जंगल में होकर गुजर रहे थे। जंगल काफी घना था। वे जंगल में काफी अंदर तक प्रवेश कर गए। तभी उन्हें एक चीता दिखाई दिया। वे दोनों एक ऊंचे पेड़ पर चढ़ गए। चीता आगे निकल गया। फिर वे दोनों उतर गए और जंगल को जल्दी-जल्दी पार किया और उनकी जान बच गई। चीता पेड़ पर चढ़ जाता है लेकिन चीता को उन दोनों मित्रों के कोई जानकारी नहीं थी। पेड़ उनके बचने के लिए एक प्रकार से सहारा बन गया।
6. मोहन को परीक्षा में सफलता के लिए उसका पुराना अनुभव काम आया और उसे सरकारी नौकरी मिल गई। उसका पुराना अनुभव सफलता में सहायक सिद्ध हुआ।
हम विश्वास करते हैं कि आपको लेख पढ़कर “डूबते को तिनके का सहारा मुहावरा” स्पष्ट रूप से समझ में आ गया होगा। यदि आपका कोई सवाल हो तो कमेंट करें।
शुक्रिया धन्यवाद।
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