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MUHAWARE / March 8, 2025

“अन्धे के हाथ बटेर लगना” मुहावरे का अर्थ क्या होता है/ Andhe Ke Hath Bater Lagna Meaning in Hindi -4

Andhe Ke Hath Bater Lagna Muhaware Ka Meaning in Hindi 

 

 

Andhe Ke Hath Bater Lagna Ka Arth / अंधे के हाथ बटेर लगना 

 

“अंधे के हाथ बटेर लगना” हिन्दी भाषा का लोकप्रिय और चर्चित मुहावरा है। इस मुहावरे का प्रयोग उस समय किया जाता है, जब अयोग्य व्यक्ति को कोई कीमती वस्तु मिल जाती है। जिस वस्तु का उस व्यक्ति के लिए मिलना बहुत ही असम्भव था।

 

जब कोई इंसान अंधा हो और उसे कोई अच्छी वस्तु आंखों के बिना देखे मिल जाती है तो वह वस्तु एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। क्योंकि जो व्यक्ति देख सकते हैं उनके लिए भी वह वस्तु दुर्लभ होती है।

 

अंधे के हाथ बटेर लगना मुहावरे का अर्थ क्या होता है/

Andhe Ke Hath Bater Lagna Muhavara in Hindi

 

1. अंधे के हाथ बटेर लगना /

Andhe Ke Hath Bater Lagna.

 

2. अयोग्य व्यक्ति को कीमती वस्तु मिलना /

Ayogya Vyakti Ko Kimati Vastu Milna.

 

3. बिना प्रयास के अच्छी चीज प्राप्त करना /

Bina Prayas Ke Achchhi Cheeze Prapt Karna.

 

4. किसी मूर्ख व्यक्ति को शानदार वस्तु मिलना /

Kisi Moorkh Vyakti Ko Shandar Vastu Milna

 

5. मेहनत के बिना बड़ी उपलब्धि हासिल करना /

Mehanat Ke Bina Badi Upalabdhi Hasil Karna.

 

6. बिना परिश्रम के बड़ी वस्तु प्राप्त करना /

Bina Parishram Ke Badi Vastu Prapt Karna

 

 

भारत के जिन क्षेत्रों में हिन्दी भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं। वहां हिन्दी के मुहावरे “अंधे के हाथ बटेर लगना” का आम बोलचाल में प्रयोग किया जाता है। जब किसी व्यक्ति को मेहनत के बिना बड़ी उपलब्धि हासिल हो जाती है, बिना प्रयास के अच्छी चीज प्राप्त कर लेता है या किसी मूर्ख व्यक्ति को शानदार वस्तु मिल जाती है।

 

आइए “अंधे के हाथ बटेर लगना” का वाक्य प्रयोग और व्याख्या उदाहरण सहित जानते हैं।

 

“Andhe Ke Hath Bater Lagna Ka Vakya Prayog/

अंधे के हाथ बटेर लगना मुहावरे का वाक्य प्रयोग जानिए ?

 

1. मनसुख पढ़ने में बहुत कमजोर था। दसवीं बोर्ड परीक्षा में वह प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हो गया।‌ अब तो “अंधे के हाथ बटेर लग गई”।

 

2. राजीव के पिता के आकस्मिक निधन के बाद राजीव को क्लर्क की सरकारी नौकरी मिल गई। यह तो भाई “अंधे के हाथ बटेर लगना” वाली बात हो गई।

 

3. मनु पैदल-पैदल बाजार जा रहा था। रास्ते में उसे पैसों और ज्वैलरी से भरा मिल जाता है। यह तो “अंधे के हाथ बटेर लगना” जैसा हो गया।

 

4. मीना नाम की लड़की पढ़ने में होशियार नहीं है। उसने सरकारी नौकरी के लिए पहली परीक्षा दी और अध्यापिका बन गई। अब तो मीना को “अंधे के हाथ बटेर लगना” वाली बात सत्य हो गई।

 

5. सुधा नाम की महिला रास्ते में जा रही थी। उसे एक सोने का हार एक डिब्बे में बंद मिला। जो किसी राहगीर का गिर गया था। अब सुधा बहुत प्रसन्न हुई। यह तो “अंधे के हाथ बटेर लगना” जैसी कहानी बन गई।

 

Andhe Ke Hath Bater Lagna Muhavare Ki Vyakhya/ अंधे के हाथ बटेर लगना मुहावरे की व्याख्या उदाहरण सहित समझिए

 

“अंधे के हाथ बटेर लगना” मुहावरे को निम्नलिखित उदाहरणों से समझ सकते हैं –

 

1. व्याख्या उदाहरण सहित

दिनेश बहुत गरीब लड़का था। वह पढ़ाई में भी फिसड्डी था।‌ उसने अपने मित्र से कुछ रुपए उधार लिए। उन पैसों से उसने एक परचून की एक छोटी सी दुकान खोली। शुरुआत में दिनेश को बहुत समस्या आई। धीरे-धीरे दुकानदार पर बिक्री बढ़ लगी। अब दिनेश के पास धीरे-धीरे पैसा इकट्ठा होने लगा।

उसने उस दुकान को बहुत बड़ा रूप दिया और उसकी प्रतिदिन की आमदनी में बहुत अधिक बढ़ोतरी हो गई। उसके मित्र कहने लगे कि भाई यह तो “अंधे के हाथ बटेर लगना” जैसा चमत्कार हो गया। आज हम सभी बेरोजगार घूम रहे हैं। दिनेश एक बड़ा सेठ बन गया है।

 

2. व्याख्या उदाहरण सहित

हिन्दी भाषा में एक कहावत प्रसिद्ध है कि भगवान किसी व्यक्ति को राजा से रंक और रंक से राजा कब बना देता है यह किसी को पता नहीं होता है। एक साधारण से मानव शरीर को कब ताज मिल जाए यह उसे बिल्कुल भी पता नहीं होता है। इस कहावत को आज हम प्रमाण के साथ एक घटना से समझते हैं।

 

अभी-अभी फरवरी 2025 में महाकुंभ (Mahakumbh)का आयोजन प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में हुआ। वहां करोड़ों की संख्या में लोग देश-विदेश के कोने-कोने से पर्व लेने के लिए एकत्रित हुए। इस महाकुंभ (Mahakumbh) में अनेक दुकानदार अपनी दुकान लगाए हुए थे।

 

उस मेले में एक युवती अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए विभिन्न प्रकार के मनियां से बनी माला बेच रही होती है और जिसका नाम था मोनालिसा (Monalisa) ।

 

इस युवती के रूप सौन्दर्य को देखकर मीडिया वालों ने इसे highlight कर दिया और महाकुंभ (Mahakumbh ) में आने वाला हर व्यक्ति उस उससे मिलने लगा। बात इतनी फैली की मुम्बई से फिल्म इंडस्ट्री के लोग आए और सामान्य सी दिखने वाली माला बेचने वाली मोनालिसा (Monalisa) एक प्रसिद्ध हीरोइन बन गई।

 

मोनालिसा के लिए यह तो “अंधे कै हाथ बटेर लगना” (Andhe Ke Hath Bater Lagna) वाली बात हो गई। क्योंकि मोनालिसा पढ़ी लिखी नही है और वह कोई नृत्य करना भी नहीं जानती। फिर भी बिना किसी मेहनत के एक उच्च स्थान प्राप्त कर लेती है।

 

3. व्याख्या उदाहरण सहित

एक समय की बात है। दो मित्र थे। अजय और विजय जिनके नाम होते हैं। उनमें घनिष्ठ संबंध थे। वे दोनों अपना अधिकांश समय साथ ही व्यतीत करते। एक बार दोनो मित्र पैसा कमाने के लिए एक बड़े शहर में चले जाते हैं। वहां पहुंच कर वे काम की तलाश करने लगते हैं।‌

पांच सात दिन काम देखते रहे। एक दिन दोनो को काम मिल जाता है लेकिन अलग-अलग लोगों के साथ। दोनों मित्र अलग अलग लोगों के साथ काम करने चले जाते हैं। अजय पांच हजार रुपए में नौकरी करने लगा। विजय ने अपने मालिक से कोई पैसा तय नहीं किया था।

विजय के मालिक के घर तीन सदस्य थे। दोनों पति-पत्नी और उनके एक सुंदर पुत्री थी। जिसकी उम्र लगभग अठारह वर्ष हो चुकी थी। विजय के मालिक ने उसके व्यवहार को देखकर अपनी पुत्री की शादी उसके साथ कर दी। और विजय को अपनी सारी सम्पत्ति का वारिस बना दिया।

विजय की अब लाटरी ही लग गई। उसके लिए सुंदर पत्नी मिल गई और उस मालिक की सारी सम्पत्ति भी अपनी हो गई। विजय की तो “अंधे के हाथ बटेर लगना” वाली बात हो गई। वह आराम से अपनी ज़िंदगी जीने लगता है।

 

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शुक्रिया धन्यवाद।

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