Aag Me Ghee Dalna Muhavare Ka Arth Aur iski vyakhya
आग में घी डालना ( Aag me Ghee Dalna) मुहावरे का अर्थ और इसका वाक्य प्रयोग कैसे करते हैं?
हिन्दी व्याकरण में मुहावरे बहुतायत में आम बोलचाल में रोजाना कहीं ना कहीं प्रयोग किए जाते हैं। मुहावरे की इस श्रृंखला में आज हम हिन्दी व्याकरण के बहुत प्रसिद्ध मुहावरे “आग में घी डालना” ( Aag me Ghee Dalna ) का सरल और सटीक शब्दों में विस्तृत अध्ययन करेंगे।
हिन्दी भाषा में “आग में घी डालना” मुहावरे को ऐसे समय प्रयोग किया जाता है, जब कहीं दो या अधिक व्यक्तियों में झगड़ा हो रहा है, उस समय कोई तीसरा व्यक्ति आकर उनके झगड़े को बढ़ाने के लिए उन्हें भड़काना आरम्भ कर देता है और लड़ाई पहले अधिक तेज हो जाती है। किसी व्यक्ति के लड़ाई-झगड़े, विवाद, कलह, आदि को को बढ़ावा दिया जाता है तो आम बोलचाल में इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है।
“आग में घी डालना” का मतलब/ अर्थ/ भावार्थ
जिस प्रकार कोई हवन आदि कार्य किए जाते हैं उसमें घी का प्रयोग किया जाता है। घी उस हवन की ज्वाला को तेज करता रहता है। अर्थात अग्नि तेज रूप में प्रकट होने लगती है। उसी प्रकार किसी व्यक्ति के झगडे को यदि किसी जलीकटी बात कहकर और अधिक बढ़ाया जाता है, वह “आग में घी डालना” मुहावरा कहलाता है।
1. मोहन और मंजीत में किसी बात को लेकर झगड़ा हो रहा था। उसी समय घीसालाल आया और उनके झगड़े को और अधिक बढ़ा कर आग में घी डालने का कार्य किया।
2. सुधा और शशि दोनों एक ही कक्षा में साथ-साथ पढ़ती थी। एक दिन किसी पुस्तक को लेकर उनमें झगड़ा हो गया। कुछ देर बाद मौना नाम लड़की आती है और उनको भड़का दिया, जिससे झगड़ा बढ़ गया। मौना ने उनके झगड़े में “आग में घी डाल दिया।
3. दो मित्रों में किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। उनके पास भीड़ इकट्ठी हो गई। भीड़ ने उनकी लड़ाई में “आग में घी डालने का कार्य शुरू कर दिया। भीड़ में से लोग कभी एक मित्र का पक्ष ले रहे, कभी दूसरे मित्र को भड़काना आरम्भ कर देते हैं। जिससे झगड़ा शान्त होने के बजाय और अधिक बढ़ गया।
4. रोड़ पर दो बाइक सवारों का एक्सीडेंट हो जाता है। भगवान की कृपा से वे बड़े हादसे का शिकार होने से बच जाते हैं, उनके मामूली चोटें आई। दोनों शान्ति से जाने ही वाले थे कि एक उनमें से एक व्यक्ति का मित्र आ गया और उसने “आग में घी डालना” प्रारम्भ कर दिया। जिससे उनका झगड़ा इतना बढ़ गया कि पुलिस ने दोनों को शांति भंग के आरोप में जेल में बंद कर दिया।
रघु और मनोहर दो भाई थे। उनके काफी खेती बाड़ी थी। दोनों भाई सुबह से शाम तक खेतों में काम करते थे। उनके हर साल अच्छी पैदावार होती थी। उनके परिवार में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की होने लगती है। रघु बड़ा भाई था। उसकी शादी हो गई थी। उसके दो बच्चे थे एक लड़का और एक लड़की।
मनोहर कक्षा दसवीं की परीक्षा दे रहा था। वह अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो गया। उनके परिवार की उन्नति से उनके अन्य पारिवारिक लोग ईर्ष्या करते थे। उन्होंने धीरे-धीरे मनोहर को अपनी मीठी बातों में फंसा लिया। और उससे रघु के बारे में बराई करने लगते हैं। वे कहते कि उसकी शादी हो गई, उसकी बीवी, बच्चे हैं। रघु आपकी शादी करने वाला नहीं है।
आपको सारी जिंदगी उनकी गुलामी सहन करनी होगी। इस प्रकार उन्होंने उसको भड़काना आरम्भ कर दिया। एक दिन दोनो भाईयों में इस बात को लेकर झगड़ा हो गया। रघु ने अपने भाई मनोहर को समझाने का काफी प्रयास किया। लेकिन पडौसियों ने “आग में घी को डालना”शुरू कर दिया। और मनोहर को इतना भड़काया कि झगड़ा बहुत ज्यादा बढ़ गया।
झगड़ा अधिक बढ़ने के कारण दोनों भाइयों का बंटवारा हो जाता है। मनोहर को कुसंग में रहने की आदत हो गई। उसकी कभी शादी नहीं हुई। और। धीरे-धीरे वह विभिन्न प्रकार के व्यसनों में लिप्त हो जाता है। उसकी जमीन बिक जाती है। वह हमेशा बीमार बना रहता है। और एक दिन इस संसार को जवान अवस्था में छोड़ कर चला गया।
“आग में घी डालना” मुहावरे से हमें शिक्षा लेनी चाहिए। कभी किसी दूसरे व्यक्ति की बातों में आकर व्यर्थ ही क्रोध नहीं करना चाहिए। किसी भी कार्य को करने से पहले अपने विवेक का प्रयोग करना चाहिए और सच्चाई का पता चाहिए।
हिन्दी में एक कहावत प्रसिद्ध है कि – बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय।”
हम आशा करते हैं कि आग में घी डालने का क्या प्रभाव होता है। आपको भली-भांति समझ में आ गया होगा। आपका कोई सवाल हो तो कमेंट कर सकते हैं।
पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद।
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