हिन्दी व्याकरण में “अपना रंग जमाना ” (Apna Rang Jamana) एक प्रसिद्ध और जाना माना मुहावरा है। जब कोई व्यक्ति अपनी कला के द्वारा, अपना कोई कृत्य दिखाकर या अपने मन के भाव दूसरों के सामने प्रस्तुत करके लोगों को अचंभित कर दे, आकर्षित कर देता है या प्रभावित कर देता है, उस समय दर्शक और श्रोता कहते हैं कि इसने तो अपना रंग जमा दिया। इस लेख में इस मुहावरे को वाक्य प्रयोग और व्याख्या सहित समझिए।
1. मानवी ने विद्यालय के वार्षिक उत्सव में डांस करके अपना रंग जमा दिया और सभी लोग अचंभित रह गए।
2. मनु को अपनी कविता सुनाकर चारों ओर समां बांध दिया। लोग कहने लगे कि भाई इसने कविता गायन में अपना रंग जमा ही दिया।
3. तारेश ने कक्षा दसवीं में प्रथम स्थान प्राप्त करके अपना रंग जमा दिया। उसने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए।
4. विष्णु ने क्रिकेट मैच में चौका, छक्के लगाकर अपना रंग जमाना आरम्भ किया। उसने सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
5. विशाल ने दौड़ में राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करके अपना रंग जमा दिया। सभी लोगों ने उसको बधाईयां दी।
एक बार राज्य सरकार ने ग्रामीण ओलंपिक खेलों का आयोजन कराया। इस आयोजन में पंचायत स्तर पर प्रतियोगिता का पहला चरण हुआ। इसके बाद जिला स्तर पर और अंत में राज्य स्तर पर आयोजन किया गया।
हमारे विद्यालय से भी विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया। हमारी पंचायत में कबड्डी, खो-खो, रस्साकसी, क्रिकेट, फुटबॉल, आदि खेलों में भाग लिया।
हमारी पंचायत की टीमों ने सभी खेलों में “अपना रंग जमाना” आरम्भ कर दिया। कबड्डी में हमारी पंचायत की टीम ब्लाक स्तर पर प्रथम रही। इसके बाद क्रिकेट प्रतियोगिता में भी पहला स्थान प्राप्त करके सभी दर्शकों को अपना चमत्कार दिखाना आरम्भ किया।
आगे चलकर हमारी पंचायत की दोनों टीमें क्रिकेट और कबड्डी की ने जिलास्तरीय प्रतियोगिता में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बाद राज्य स्तर पर भी दोनों टीमें पहुंची और लोगों को उन्होंने मंत्रमुग्ध कर दिया। यहां पर भी पानी पंचायत की टीम अव्वल रहीं।
दोनों टीमों को पुरस्कृत करके सम्मानित किया गया।
हमारे गांव के पास शीतला माता का मेला लगता है। यह मेला चैत्र कृष्ण अष्टमी को लगता है लेकिन यह अष्टमी से पांच दिन पहले शुरू होता है और पंद्रह दिन तक चलता है।
इस मेले में विभिन्न प्रकार के झूले, नौटंकी, घुड़दौड़, नाल उठाना आदि आयोजन होते हैं। अबकी बार मेला शुरू हो गया है। इस मेले में एक मौत का कुआं वाला खेल दिखाने वाला भी आया है।
उन्होंने एक लकड़ी का कुआनुमा आकृति बनाई है। जिसमें मोटरसाइकिल और कार को काफी तेज गति से दौड़ाया जाता है। इसमें चार पांच लोग हैं जो एक साथ और एक कार को चलाते हैं। उन्होंने सारे मेले में अपना खेल दिखाकर रंग जमा दिया है।
हर कोई व्यक्ति मौत का कुआं वाला खेल देखकर अचंभित हो रहे हैं।
हमें इस मुहावरे से शिक्षा लेनी चाहिए। हमें अपने मन के भावों और विचारों को व्यक्त करना चाहिए। अपने अंदर की सृजनात्मक शक्ति और बुद्धि इन आयोजनों में परखना चाहिए। जिससे अपनी बुद्धि और शरीर का स्वतंत्र रूप से विकास हो सके।
हम उम्मीद और आशा करते हैं। कि यह लेख “अपना रंग जमाना” भली-भांति समझ गए होंगे। किसी भी सवाल के कमेंट करें।
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